Monday, August 13, 2007

ब्लाग्स पर 'मीडिया' के लेख

पत्रकार और मीडिया का नाता श्वास और जिंदगी का है। दोनों के लिए एक उद्देश्य होने पर ही समाज का हित होता है। लेकिन वक्त बदलता गया और दोनों ने अलग अलग राह धर ली। आज पत्रकार एक शून्य में जीता है और पत्रकारिता बाजार में। खैर हमने जब चिट्ठाजगत को खंगाला तो बीते दिनों में ये लेख हमें भाएं।

आप भी पढ़ें....

पत्रकारों पर हमला : एकजुट होइए या फिर पिटते रहिए

दबी , दबती , दब गई जन पत्रकारिता

पत्रकारिता जनता से दूर होती जा रही है : पी साईनाथ

एक पत्रकार की दुखद मौत, हमारी श्रद्धांजलि

विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन से आगे - आलोचनाओं में छुपा है नये रास्‍तों का सफर न्‍यूयार्क से लौटकर :- पवन जैन

मीडिया का गिद्धभोज

श्श्श्श्श… मुस्लिम

एक अच्‍छी बाढ़ सबको पसंद है

मेरे लिए पत्रकारिता की पाठशाला हैं पी साईनाथ

खबर क्या है?

गिरफ्तारी से मालामाल हुआ हनीफ

ये पत्रकारिता का स्‍वर्णकाल है

हिन्दी टीवी पत्रकारिता और पाकिस्तान में फ़र्क है


हिंदी पत्रकारिता का प्रश्न काल

आज कौन तय कर रहा है पत्रकारिता का मक़सद?

स्टाक एक्सचेंज और अच्छी पत्रकारिता का संबंध

टीवी पत्रकारिता का सबसे शर्मिंदा वक्‍त

पत्रकारिता का भटियारापन और वैज्ञानिक का भटकता मन

कब था पत्रकारिता का स्‍वर्ण काल?


पत्रकारिता को ज़िंदा रखने वाले लोग


भूमंडलीकरण और पत्रकारिता

राजा साहब का थोबड़ा टी.वी. में.


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2 comments:

संजय तिवारी said...

इतनी मेहनत पर कोई टिप्पणी नहीं. क्यों?

MediaYug said...

हमें इंतजार था। पर पता नहीं क्यों। क्या मीडिया इतना हल्का हो चुका है कि लोग उसपर लिखे लेख को भी हल्का लेने लगे हैं। बहरहाल जारी रहना ही जिंदा रहना है।