Saturday, September 30, 2006

हफ्ता गुजरा टीवी पर ( 23-30 सितम्बर )

टीवी को क्या चाहिए। खबर, जो तहलका मचा सके, लीजिए तहलका ने खुद ही खोला इस राज़ को कि जेसिका लाल हत्याकांड में गवाह मजबूर है। जानते है। पर जान भी तो है। सनसनी जैसी खबर नहीं थी ये। पर न्याय की राह में एक रोड़ा जरूर दिखा गई। रोड़ा तो भारत पाकिस्तान के बीच भी चल रहा था, भई मुशर्रफ साहब ने किताब लिखी, स्वीकार किया कि पाक सेना ने कारगिल में पाक काम किया। भई शाबासी के काबिल है पाक सेना। और जनरल मुशर्रफ भी। आगरा में वे खुद और वाजपेयी जी के शर्मसार होने की बात कह गए। और तो और भारत के अणुबम की दम ये कहकर निकाल दी कि इसमें पाक का हाथ है। खबर तनी। लगा कि किताब नहीं फिल्म आने वाली है। हीरो जनरल, विलेन भारत। विलेन को दिल्ली सरकार भी हो चली। तोड़ती है, सील करती है और कोर्ट में अधिसूचनाएं देती है। जनता टूटती है। कोर्ट ने दशहरी दीपावली को लेकर राहत दी। टीवी पर हथौड़े मारते एंकर कुछ त्यौहारी होते नजर आए। अरे भई धूम तो दुर्गापूजा की भी टीवी पर खूब रही। कोलकाता की दुर्गोपूजा के नजारे हर टीवी चैनल पर पसरे रहे। नजारे राम और रावण के भी थे, पर टीवी ने इसे रासलीला से जोड़ दिया इस बार। जमाना रासरंग का जो है। रामलीलाएं हो रही है। शहरों में। भीड़ जोरदार होती है। मर्यादा राम की, रावण का हठ, सीता की शपथ और जनता की आवाज। बोलो सियापति राम चंद्र की जय। पर बीच बीच में कजरारे कजरारे तेरे कारे कारे नैना बज उठता है। जनता को फर्क नहीं पड़ता। वैसे भी बच्चे टीवी चलाकर पढ़ते है, आण्टियां किचन में से धारावाहिकों पर रोती है। और पुरूष अखबार को साथ टीवी देखने लगा है। कुछ मर रहा है। वैसे वीकेंड पर एक लाइव सुसाइड़ भी टीवी पर दिखा। वजह बेफिजूल का तनाव था। तनाव तो था ही कि किस तरह मरता है एक आदमी टीवी पर। सजा हो रही है, किस्तों में। तेरह साल बाद मुंबई बम धमाकों के गुनहगारों को सजा भी टीवी पर हो रही है। आज फलां को उम्रकैद, फलां को इतने साल, और फलां रिहा। सब टीवी पर कहते है निर्दोष है। जनता जानती है। सजा यूं ही नहीं मिलती। कैदी नम्बर ११७ संजय दत्त को फैसला सुनने में अभी देर है। और टीवी को उसी का बेसब्री से इंतजार। एक सजा और हो गई, मोनिका बेदी को। पांच साल। जितने दिन पर्दे पर न बीते, उससे ज्यादा टीवी पर वो छाई रहीं। देखना है कि मीडिया ट्राएल से कितना नफा नुकसान समाज और असामाजिक तत्वों को होता है। ये जारी है। कभी स्मैकियों के लिए, कभी हत्यारों के लिए, तो कभी न्याय की आस में जूझने वाले एक्टेविस्टों के लिए। प्रियदर्शिनी मट्टू मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब फैसला आएगा। जेसिका मामले भी मोड़ आते जा रहे है। देखना है टीवी पर अब इस हफ्ते किसे सजा हो ती है और किसे न्याय मिलता है।

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1 comment:

संजय बेंगाणी said...

लगता हैं आप साप्ताहिक समिक्षा करने वाले हैं. टीवी वालो सावधान हो जाओ.
:)